दो पहलू...


वो एक्यूपंचर में पारंगत,
मैं स्पर्श महसूस करने में अक्षम.
एक सिक्के के दो पहलू,
दोनों अद्भुत-दोनों विलक्षण.

3 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... said...

shaandaar......
dekhan mein chhotan lage

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

Sanjay bhaskar
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर said...

lajwaab