अम्मा........


1)

आज आसमान बदरंग है,
मैं गीत नहीं रंग सकता.
माँ को बर्दाश्त कैसे हो,
उसने दी है चुनर धानी....

2)

कहते रहे सब बार बार,
ब्याह दो बिटिया अब,
देखो ना बड़ी हो चली.
अम्मा कैसे मान लें,
अम्मा की वो मंजरी....

3 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... said...

कमाल की भावना

VaRtIkA said...

"अम्मा कैसे मान लें,
अम्मा की वो मंजरी...."

:)

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com