क्षणिकाएँ....



चाँद का टुकडा...

अम्मा के कलेजे,
से जो गिरा.
वो ही छोटा सा,
टुकडा हूँ.
माँ खुद को,
चाँद नहीं कहती.
मैं फिर भी,
चाँद का टुकडा हूँ.




टूटा मग...

दो बरस कहूँ,
या कहूँ कोई,
पाई* करोड़ पल.
आँखें बरसेंगी,
शावर में,
जो तुम न,
रहोगे कल.




ले लो...

मैं लिखूँ,
तुम पढो,
कुछ कहो.
नहीं गुन,
पाने पर,
प्रेम धुन.
जाओ खीज.
इससे अच्छा,
देखूँ चार क्षण.
दे जाऊं ,
शब्द बीज.




पिता...

जिस रोज नहीं खाता,
या जाता हूँ भीग.
या नहीं समझ पाता कुछ,
उस दिन आत़े हैं,
उनके ख़ास शब्द.
बिन माँगे वर देना,
खासियत है मेरे खुदा की.





 एक बूँद....

अपनी चंद्रकलाएँ नहीं,
कोई चम्पई लावण्य नहीं.
नेह की एक रुग्ण,
झीरी ही गिरा दो.
जागृत होगा उष्ण जीवन,
तृप्त हो चूना पत्थर में.






तुम्हारी अमानत...

अखरती थी तुम्हारी चुप,
तो चुरा लिए मैंने,
तुम्हारी खामोशी के फूल.
मेरी बात-बेबात ख़ामोशी,
अब खटकती है तुम्हे.





निष्प्राण स्नेह...

यदि मेरा स्नेह,
लगता है परिधि,
तो बन्धु!
तोड़ दो इसे.
आक्रान्त जीवन से,
स्नेह निष्प्राण भला.





मालती के फूल...

मालती के फूल,
नहीं खिलते बंध,
लक्ष्मण रेखाओं में.
उड़ने दो पराग कण,
सुदूर बियावानों में.
आँखें बिटिया की भी,
रखती रोशनाई हैं.





रोने दो...

बहने दो आज,
या उड़ने दो वाष्प.
जो सूखे आँखों,
का बूढा सागर.
तो चुन लेना,
अपनी प्रीत के,
बहुत मुक्ताफल,
छुपा रखे हैं.





यकीन रखो...

मेरे सारे शब्द,
हर एक गीत,
लगने लगे अप्रमाणिक.
तो निःसंकोच माँग लेना.
यह सिन्धु हर एक,
बूँद लौटा देगा.






बंटवारा...

कागज़ की नाव,
कागज़ का मैं,
कागज़ के तुम,
नहीं डूबे किसी बारिश.
कागज़-बंटवारा,
मैं-तुम जैसे,
सूखी नदी में,
डूब के मरना.





पाई= Pi = 3.14

9 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

उम्दा भावपूर्ण क्षणिकायें.

अजय कुमार said...

एक से बढ़कर एक ,आभार

Divya said...

awesome !

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

tumhari kshanikayen ...:) humesha ki tarah ..:) hain ...hehe...amma aur chand ka tukda wali ..sabse :) hai ..

सर्प संसार said...

जींवंत और सच के करीब।
---------
क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

arun c roy said...

bahut umda aur bahvpoorn kshinikaayen ! naya prayog shabdon ka ! badhai

मेरे भाव said...

kam shadon me gehre bhav! umda rachnaaye ! bhav se bhari !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सारी क्षणिकाएं लाजवाब...चाँद का टुकड़ा बहुत अच्छी लगी..

Avinash Chandra said...

aap sabhi ka bahut bahut dhanyawaad