मेरे बाद...



आना मिलने,
और इस बार,
हँस देना सच में.

मिलाना हाथ,
और भींच देना,
जोर से, कस के.

ढलकाना आँसू,
पर इस बार,
सच्चे हों, गर्म हों.

रिश्ते की गर्माहट,
एक बार भी,
दिखे तो यहाँ.

मरणोपरांत सही...

8 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

रश्मि प्रभा... said...

marne se pahle.... prapy mrityu se pahle hota hai

रचना दीक्षित said...

क्या लेखन कला है ?कमाल है ........एकदम बाँध कर रखती है.

Avinash Chandra said...

aap sabhi ka bahut bahut dhanyawaad

अनामिका की सदाये...... said...

कल आपकी रचना चर्चा मंच पर होगी कृप्या देखें.

आभार
अनामिका

VaRtIkA said...

mrityu si hi kshanik aur usi ki tarah teekhi aur grimaamayi lagi yeh rachnaa...

Udan Tashtari said...

भावपूर्ण!

Avinash Chandra said...

aap sabhi ka aabhar