तीन पंखुडिया....

असली सुपरस्टार.....

"अम्मी, अम्मी
सुपरस्टार कैसा होता है."
"जा देख ले,
अपने अब्बू को."
तब नहीं समझा,
सच नहीं माना.
अब दस गुनी,
तनख्वाह में,
आधा घर नहीं चलता,
तब जाना.
तुम सच कहती हो अम्मी.


चिराग तले अँधेरा...

अपनी सूनी पलकों पे,
लेके यादों के दिए,
उनको दिखायी राह,
वो दूर चल दिए.

ना उनकी थी खता,
न उनको था पता.
उनकी यादों के दीयों ने,
नयन नम किये.


रिश्ता........

भैया !!! मेरा समोसा ??
टिंकू ने मेरा बैट,
तोड़ दिया.
आईला!!! तुम कितने,
दुबले हो गए हो.
पंजा लड़ाओगे,
मुझसे अब?
चिपट के कहता,
की भाभी पर गयी.
"वो घर में नहीं,
परसों आना, मिलेंगे."

1 टिप्पणियाँ:

anand anand said...

avinash ji,abhi aapki kavitaon ko aik kram mein padhta chala gay,ye sab ki sab achchi hain ye kahna matr aupcharikta hi hogi,parantu jis aik kavita ne haath pakad ke rok liya wah"superstar"thee...is kavita mein apna hi anubhav dikha,bahut hi marmsparshi rachna....