मेरे पड़ोसी...

तीन फर्लांग दूर,
मेरे घर से ,
बशीर चचा रहते हैं।
कसम से चची ,
गजब के पकौडे,
बनाती हैं।

पिछवाडे रेशमा,
आपा रहती हैं।
जब उनकी दवात,
को लाता हूँ स्याही।
झोली भर भर ,
बलाएं लेती हैं।

रहमत गली का,
सबसे अच्छा,
बल्लेबाज है।
और रिजवान ,
मेरे दिल के ,
बहुत पास है।

कसम माँ दुर्गा की,
बरकत से बढ़िया,
मुर्तिसाज़,
शहर में नही।

माँ की बीमारी में,
रोटियाँ सलीम के,
घर खाई हैं।
हर ईद मैंने भी,
टोपियाँ चिकन की,
सिलवाई हैं।

बस यही नही,
अविनाश गीत गाता है,
आशुतोष अव्वल है,
पढ़ाई में।

मरियम का कत्थक,
और हरी की ,
चित्रकला कमाल है.
सुखविंदर अगला,
भूटिया है।

विजय पंडित जी,
के बिना अधूरी है,
हर पूजा।

आपको कुछ,
अजीब लगता है क्या??

बताता चलूँ,
मेरे भारत में,
पड़ोसी हिंदू नही,
मुसलमान या,
सिख नही होता।

मेरे भारत में पड़ोसी,
भारतीय होता है,
बस भारतीय............................

1 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा said...

मेरे भारत में पडोसी भारत.......बहुत सत्य , हर रिश्तों को काफी अपनत्व से उभारा है
एक आदर्श कविता........