गुफ्तगू...

सोचता हूँ की आवारागर्दी,
से अब याराना कर लूँ.
जो मिलो इस बार तुम,
तो गुफ्तगू का समान होगा.

3 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

sangeeta swarup said...

wah kya baat kah di hai....bahut khoob

रश्मि प्रभा... said...

waaaaaaaaah