रिश्ते.....

पिता...

शैतान को खौफ है उससे,
खुदा भी रंज रखता है।
इस मिटटी की दुनिया में,
वो ही महफूज रहता है।
कब्र पर नाम खुदते हैं,
गलत पिता के।
मौत होती है औलाद की,
पिता उसकी रगों में बहता है।


भाई....

जब भी मुझे शक हुआ,
खुदा की इबादत पर।
भगवान् के अस्तित्व पर।
देखा तुझे और,
यकीं हो आया।
कम से कम सच था,
लक्ष्मण और भरत का होना।


बहना.....

क्या मिलता है,
इक्यावन रुपये में?
रोरी चन्दन के टीके,
एक रसमलाई,
एक रेशमी धागा।
अरबों दुआएं,
करोडों बालाएं।
बहन की मुस्कान,
और वो इक्यावन,
रुपये तहे हुए,
बटुए में।
के भैया को,
कष्ट न हो ,
राहखर्च का।


माँ.....

दिया दिखाना दिनकर को,
मना है।
मशाल ले चलना पूनम को,
मना है।
अग्नि से पवित्र उम्मीद करना,
मना है।
तो कैसे लिखूं,
तुम्हारे बारे में माँ??


मैं.....

आदि हूँ, अनंत हूँ।
साधनारत संत हूँ।
जब भी गिरा धरा पर,
यूँ अकड़ कर खडा हो गया।
तारों को दी चुनौती,
पर्वतों से बड़ा हो गया.

2 टिप्पणियाँ:

God Say! said...

"Ma"

1 hi rishta sachha hai
1 hi rishta acchhha hai
1 hi rishta sabse bada
Is rishte par sab jag khada

Jesus Christ ne kaha tha swarg unka hai jo bacchhe jaisa ho jaye.
Mujhe lagta hai :
Ya, jo ma ko pahchan le.

shama said...

Pehlee baar aapke blogpe aayee hun...bohot kuchh padh daala...tippaneeke baad phir ekbaar padhne jaa rahee hun...." Mai" is rachnakee harek pankti behad sundar hai...aapke hausoloko buland kartee huee...!Behad achhe lagee...buland rakhna apne hausale hamesha, yehee kaam aayenge taumr!!