एकमात्र वर...



हे तात!
आज के दिव ही,
ऐसे ही किसी क्षण,
पुण्य मन, उछाह भर,
ले आए थे तुम,
सैकत कण भर अंजुरी,
ध्रुवनंदा के किनारे से।

हे जननी!
नक्षत्रों के ठीक नीचे,
ऐसी ही किसी वेला,
ढुलका दिया था तुमने,
स्नेह-वात्सल्य से भरा,
प्रथम अजस्र पीयूष घट।

जीव, जीवन, अंश, दर्शन,
सब कार-अकार किये,
तुमसे ही प्राप्त अनुदिन।

विचर सकूँ किसी भी,
प्रकम्पित पथ भयहीन।
न हो सकूँ ग्लानिहत,
म्लान, अधीर, दम्भी।
और रहूँ सदैव प्रणत,
चरणों में अगाध श्रद्धा से।
रचयिता आज फिर से,
मुझे अजर वर यही दो।


18 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

विचर सकूँ किसी भी,
प्रकम्पित पथ भयहीन।
न हो सकूँ ग्लानिहत,
म्लान, अधीर, दम्भी।
और रहूँ सदैव प्रणत,
चरणों में अगाध श्रद्धा से।

सुन्दर भावों को गरिमापूर्ण शब्द दिए हैं ... सुन्दर रचना ..

रचना दीक्षित said...

आपकी सारी कविताओं की तरह सुंदर शब्दों से सुसज्जित दिल को छू लेने वाली प्रस्तुति.

शुभकामनाएँ.

प्रवीण पाण्डेय said...

आप हम सबके लिये भी यही वर मांग लीजिये।

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (20-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

संजय @ मो सम कौन ? said...

जन्म दिन है क्या १८ जून को?

जनक-जननी के प्रति कैसी भावना रखते हो, अनुभव होता है और फ़िर फ़िर हृदय गर्व से और खुशी से भर जाता है। ये वरदान मिलते भी रहे होंगे और मिलेंगे भी, हमारे पास शुभकामनायें हैं, स्वीकार करो।

वाणी गीत said...

सुन्दर शबों के घालमेल में ही अटके है हम तो ...
रचयिता भी मुग्ध हुआ ही होगा ...
बहुत शुभकामनायें !

निवेदिता said...

सुन्दर भाव ......

rashmi ravija said...

विचर सकूँ किसी भी,
प्रकम्पित पथ भयहीन।
न हो सकूँ ग्लानिहत,
म्लान, अधीर, दम्भी।
और रहूँ सदैव प्रणत,
चरणों में अगाध श्रद्धा से।

इसे से बढ़कर और दूसरी आकांक्षा भी क्या...
बहुत ही सारगर्भित कविता...

दिगम्बर नासवा said...

सुन्दर रचना रची है .. उस रचियता के नाम .. जिसने जीवन रचा ...

Abhishek Ojha said...

अद्भुत ! हम भी एकमात्र वर यही माँगते हैं.

अनामिका की सदायें ...... said...

aapki bhaavnaao ko naman.

sunder prabhaavotpadak rachna.

Avinash Chandra said...

@जन्म दिन है क्या १८ जून को?
:)

प्रतिभा सक्सेना said...

देर से ही सही ,लेकिन आपके जन्म-दिवस हेतु
हार्दिक मंगल कामनायें ,और आपने जो अनुपम वर माँगा है ,उसकी संपूर्णता के लिए प्रभु से विनती ,कि इस उपयुक्त पात्र को उसका सही प्राप्य (यही वरदान)पूर्ण रूप से फलीभूत हो !

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

जय हो! मंगलमय हो! मुझे पता था कि अगर देर हो गयी तो संजय बाजी मार ले जायेंगे। वैसे देर का कारण जून प्रसन्न में है।

हार्दिक शुभकामनायें और आशीर्वाद!

रंजना said...

विलम्ब से दे रही हूँ शुभकामना इस आशा के साथ की शुभ की कामना कभी पुरानी नहीं पड़ती...

आपकी यह पावन प्रार्थना आवश्य स्वीकार हो और ईश्वर यही वर हमें भी दें,यही आकांक्षा है...

Mrs. Asha Joglekar said...

ऐसी प्रार्थना स्वीकार ही होगी ।

Avinash Chandra said...

इस स्नेह का आभार

gohost said...

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